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‘हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला पीएम बने’, ओवैसी ने रखी बड़ी सियासी ख्वाहिश
- Reporter 12
- 04 Apr, 2026
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आलम की खबर के विशेष संवाद में ममता बनर्जी, कांग्रेस, भाजपा और मोदी सरकार की विदेश नीति पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने सेक्युलरिज्म, यूएपीए और मुस्लिम प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भी बेबाक राय रखी।
दिल्ली आलम की खबर।नई दिल्ली: चुनावी माहौल के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कई बड़े राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है। आलम की खबर के विशेष संवाद में ओवैसी ने बंगाल-असम की राजनीति, विपक्षी दलों की रणनीति, सेक्युलरिज्म की मौजूदा परिभाषा, यूएपीए कानून, विदेश नीति और मुस्लिम प्रतिनिधित्व जैसे कई अहम सवालों पर बेबाकी से जवाब दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने न केवल अपने ऊपर लगने वाले आरोपों का जवाब दिया, बल्कि देश के सर्वोच्च पद को लेकर अपनी एक ऐसी निजी ख्वाहिश भी जाहिर की, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने कहा कि उनकी दिली तमन्ना है कि भारत में एक दिन हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री बने, और उन्होंने इसे लोकतंत्र की संभावनाओं के भीतर पूरी तरह संभव बताया।
पश्चिम बंगाल की राजनीति और ममता बनर्जी के सेक्युलर रवैये पर बात करते हुए ओवैसी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्हें संविधान की प्रस्तावना में दर्ज सेक्युलरिज्म पर पूरा भरोसा है, लेकिन आज जो ‘पॉलिटिकल सेक्युलरिज्म’ चल रहा है, वह उनके मुताबिक एक तरह की ‘गाली’ बन चुका है। ओवैसी ने ममता बनर्जी के पुराने राजनीतिक रुख का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पहली बार 2004 में सांसद बने थे, उस समय ममता खुद भाजपा के साथ थीं। उन्होंने बंगाल में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य में मुस्लिम आबादी बड़ी होने के बावजूद सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी बेहद सीमित है। मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों की समस्याओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां की जमीनी स्थिति अब भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
‘मेरा कोई दोहरा चेहरा नहीं’, ओवैसी ने दिया साफ जवाब
बातचीत के दौरान जब ओवैसी से उनके तीखे बयानों और चुनावी रणनीति को लेकर ‘दोहरे चेहरे’ का सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि उनका कोई दोहरा चेहरा नहीं है और वे हमेशा जैसे हैं, वैसे ही जनता के सामने रहते हैं। ओवैसी ने कहा कि जब बात भारत की सुरक्षा और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की आती है, तो पूरा देश एक आवाज में खड़ा होता है और ऐसे मामलों में उनका रुख हमेशा स्पष्ट रहता है। वहीं चुनावी राजनीति में अलग-अलग दलों का एक-दूसरे से मुकाबला करना लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। उनके मुताबिक अपनी पार्टी को जिताने और दूसरों को हराने की कोशिश कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि जम्हूरियत का तकाजा है।
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बी-टीम वाले आरोपों पर बोले— इससे फर्क नहीं पड़ता
ओवैसी और उनकी पार्टी पर अक्सर ‘भाजपा की बी-टीम’ होने का आरोप लगाया जाता है। इस सवाल पर उन्होंने बेहद बेपरवाह अंदाज़ में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विरोधियों के ऐसे आरोपों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और न ही इससे उनकी राजनीतिक दिशा बदलती है। ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि लोग जो कहना चाहते हैं, कहते रहें, लेकिन इससे न उनकी रात की नींद प्रभावित होती है और न ही दिन का चैन। उन्होंने कहा कि वे अपने रास्ते पर चलते रहेंगे और जब तक जिंदगी है, अपने काम और अपनी राजनीति को उसी तरह जारी रखेंगे।
यूएपीए पर कांग्रेस को घेरा, कहा— हमने पहले भी विरोध किया
यूएपीए कानून को लेकर भी ओवैसी ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2019 में जब इस कानून को और सख्त किया गया, तब कांग्रेस ने उसका समर्थन किया, जबकि इसकी बुनियादी संरचना खुद यूपीए सरकार के दौर में तैयार हुई थी। ओवैसी ने कहा कि 2008 में तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने इस कानून में ऐसे प्रावधान जोड़े थे, जो पहले पोटा जैसे कानूनों में देखे गए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय वे संसद में इस कानून के खिलाफ मजबूती से खड़े हुए थे और समर्थन देने के बावजूद उन्होंने इसके विरोध में वोट डाला था। इस मुद्दे पर उन्होंने खुद को लगातार एक समान रुख रखने वाला नेता बताया।
विदेश नीति पर मोदी सरकार पर हमला
विदेश नीति के मोर्चे पर भी ओवैसी ने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अपनी पुरानी गुटनिरपेक्ष विदेश नीति की ताकत को कमजोर कर दिया है। ओवैसी ने कहा कि एक ओर भारत ने ईरान के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट पर काम किया, लेकिन दूसरी ओर अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया। उन्होंने इसे विदेश नीति में स्पष्टता और स्वतंत्रता की कमी बताया। इसके साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों, खासकर मालदीव के संदर्भ में भारत के घटते प्रभाव पर भी चिंता जताई और कहा कि दक्षिण एशिया में भारत की कूटनीतिक पकड़ कमजोर पड़ना चिंताजनक संकेत है।
ओवैसी की सबसे बड़ी राजनीतिक ख्वाहिश ने खींचा ध्यान
इस खास बातचीत का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा वह रहा, जब ओवैसी से पूछा गया कि क्या भविष्य में भारत का प्रधानमंत्री कोई मुस्लिम चेहरा बन सकता है। इस पर उन्होंने बिना झिझक अपनी दिली ख्वाहिश जाहिर करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि इस देश में एक दिन हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री बने। उन्होंने इसे सिर्फ भावनात्मक इच्छा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की संभावनाओं से जुड़ी उम्मीद बताया। ओवैसी के इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद प्रतीकात्मक और दूरगामी माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल प्रतिनिधित्व की राजनीति को छूता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में अल्पसंख्यक और महिला नेतृत्व की बहस को भी एक नया आयाम देता है।
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